मेरठ का तुषार चौहान कैसे बना ‘हिज्बुल्लाह’? ATS की कार्रवाई से खुला चौंकाने वाला मामला
आतंकी कनेक्शन के आरोप में गिरफ्तारी, परिवार भी हैरान—पिता बोले, कब और कैसे बदला धर्म, नहीं है जानकारी
उत्तर प्रदेश के मेरठ से सामने आया एक मामला सुरक्षा एजेंसियों और आम लोगों, दोनों को चौंकाने वाला है। यहां के रहने वाले तुषार चौहान को Uttar Pradesh ATS ने आतंकी कनेक्शन के आरोप में हिरासत में लिया है। जांच के दौरान सामने आया कि तुषार ने अपना नाम बदलकर ‘हिज्बुल्लाह’ रख लिया था, जिससे पूरे मामले ने और गंभीर रूप ले लिया है।
एटीएस सूत्रों के मुताबिक, तुषार पर संदिग्ध गतिविधियों में शामिल होने और कट्टरपंथी नेटवर्क से जुड़े होने का शक है। शुरुआती जांच में कुछ ऐसे डिजिटल सबूत भी मिले हैं, जो उसकी ऑनलाइन गतिविधियों और संदिग्ध संपर्कों की ओर इशारा करते हैं। हालांकि, एजेंसियां अभी इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं और यह पता लगाने की कोशिश में हैं कि वह किसी बड़े मॉड्यूल का हिस्सा था या अकेले काम कर रहा था।
इस पूरे घटनाक्रम ने परिवार को भी सदमे में डाल दिया है। तुषार के पिता ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि उनका बेटा कब और कैसे इस रास्ते पर चला गया। उन्होंने यह भी बताया कि परिवार को कभी ऐसा नहीं लगा कि तुषार किसी गलत गतिविधि में शामिल हो सकता है। धर्म परिवर्तन को लेकर भी उन्होंने अनभिज्ञता जताई और कहा कि यह सब उनके लिए बेहद चौंकाने वाला है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में अक्सर युवाओं को ऑनलाइन माध्यमों के जरिए प्रभावित किया जाता है। सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड चैट और कट्टरपंथी सामग्री के जरिए उन्हें धीरे-धीरे अपने जाल में फंसाया जाता है। इसी एंगल से तुषार के डिजिटल डिवाइस और ऑनलाइन हिस्ट्री की जांच की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में परिवार को भी सतर्क रहने की जरूरत है। व्यवहार में अचानक बदलाव, अलग-थलग रहना, और इंटरनेट पर ज्यादा समय बिताना जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हालांकि, हर मामला अलग होता है और बिना पूरी जांच के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है।
फिलहाल एटीएस तुषार से पूछताछ कर रही है और उससे जुड़े अन्य संभावित लोगों की तलाश भी जारी है। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि क्या इस मामले का संबंध किसी अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन से है या यह केवल स्थानीय स्तर पर सीमित मामला है।
यह मामला एक बार फिर इस बात की ओर इशारा करता है कि आधुनिक तकनीक और इंटरनेट के दौर में सुरक्षा चुनौतियां किस तरह बदल रही हैं। साथ ही यह भी जरूरी हो जाता है कि समाज, परिवार और एजेंसियां मिलकर ऐसे खतरों के प्रति जागरूक रहें।



