दिल्ली अग्निकांड: बेड पर सोते रह गए लोग, सीढ़ियों पर झुलसे शव; नौ की दर्दनाक मौत
विवेक विहार की चार मंजिला इमारत में एसी विस्फोट से लगी आग, कई लोग कंकाल में तब्दील, पहचान के लिए डीएनए टेस्ट की जरूरत
दिल्ली के शाहदरा स्थित विवेक विहार इलाके में रविवार तड़के हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। चार मंजिला एक रिहायशी इमारत में लगी आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप ले लिया, जिसमें नौ लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से झुलस गए। इस हादसे में जो दृश्य सामने आए, वे इतने भयावह हैं कि लोगों के शरीर पूरी तरह जलकर कंकाल में बदल गए।
जानकारी के अनुसार, यह हादसा उस समय हुआ जब अधिकतर लोग गहरी नींद में सो रहे थे। अचानक उठी आग की लपटों ने पूरे भवन को अपनी चपेट में ले लिया। कई लोग अपने बिस्तर से उठ भी नहीं पाए, जबकि कुछ लोग जान बचाने के लिए सीढ़ियों की ओर भागे, लेकिन तेज धुआं और आग की लपटों के कारण वहीं फंस गए और बुरी तरह झुलस गए।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आग की शुरुआत दूसरी मंजिल के पिछले हिस्से में लगे एयर कंडीशनर (एसी) में विस्फोट के कारण हुई। यह घटना करीब सुबह 3:30 बजे के आसपास हुई, जिसके बाद आग तेजी से फैलती गई और तीसरी तथा चौथी मंजिल तक पहुंच गई। देखते ही देखते पूरी इमारत धुएं और आग के गुबार में बदल गई।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आग इतनी भीषण थी कि कुछ ही मिनटों में पूरे फ्लैटों में धुआं भर गया। लोग मदद के लिए चीखते रहे, लेकिन आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कोई भी बाहर नहीं निकल सका। कई लोगों के शव इस कदर जल चुके थे कि उनकी पहचान करना भी मुश्किल हो गया है। प्रशासन का कहना है कि मृतकों की पहचान के लिए डीएनए परीक्षण का सहारा लेना पड़ सकता है।
दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। हालांकि तब तक बहुत देर हो चुकी थी और इमारत का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो चुका था। बचाव दल ने मलबे से शवों को बाहर निकाला और घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आग लगने के बाद इमारत से लगातार धमाकों जैसी आवाजें आ रही थीं, जिससे दहशत फैल गई। आसपास के लोग भी मदद के लिए पहुंचे, लेकिन आग की लपटें इतनी तेज थीं कि वे अंदर नहीं जा सके।
प्रशासन ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं और फॉरेंसिक टीम को भी मौके पर भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि क्या इमारत में आग सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था या नहीं।
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर शहरी इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि अगर समय पर सुरक्षा उपाय होते, तो शायद इतने लोगों की जान नहीं जाती।
फिलहाल पूरे इलाके में शोक का माहौल है और पीड़ित परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। यह घटना राजधानी के इतिहास की सबसे दर्दनाक आग दुर्घटनाओं में से एक मानी जा रही है।





