यूपी में बड़ी कार्रवाई: जल जीवन मिशन में लापरवाही पर 26 इंजीनियर और कर्मचारियों पर गिरी गाज, 12 सस्पेंड

योगी सरकार का 'एक्शन मोड': काम में ढीली-ढाली कार्यशैली बर्दाश्त नहीं, कई अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश

लखनऊ | उत्तर प्रदेश में ‘हर घर नल से जल’ पहुँचाने की महत्वाकांक्षी योजना ‘जल जीवन मिशन’ में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। लखनऊ से जारी कड़े निर्देशों के बाद, विभाग ने 26 इंजीनियरों और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। इसमें से 12 को तुरंत प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया गया है, वहीं अन्य के खिलाफ विभागीय जांच और वेतन रोकने जैसी कार्रवाई की गई है।

क्यों हुई इतनी बड़ी कार्रवाई?

जल जीवन मिशन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता सूची (Priority List) में सबसे ऊपर है। इस योजना का लक्ष्य हर ग्रामीण परिवार तक साफ पेयजल पहुँचाना है। हालांकि, पिछले कुछ समय से शिकायतें मिल रही थीं कि कई जिलों में काम की रफ्तार बहुत धीमी है और पाइप-लाइन बिछी होने के बावजूद लोगों को पानी नहीं मिल रहा है।

सरकार द्वारा करवाए गए इंटरनल ऑडिट और फिजिकल वेरिफिकेशन में पाया गया कि कई जगहों पर काम सिर्फ कागजों पर पूरा दिखाया गया था, जबकि जमीन पर स्थिति कुछ और ही थी। इंजीनियरों द्वारा मॉनिटरिंग न करने और ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुँचाने के आरोपों के बाद यह बड़ा एक्शन लिया गया है।

इन पर गिरी गाज (निलंबन और कार्रवाई)

रिपोर्ट के मुताबिक, जिन 26 लोगों पर कार्रवाई हुई है, उनमें अधिशासी अभियंता (Executive Engineers), सहायक अभियंता (Assistant Engineers) और अवर अभियंता (Junior Engineers) शामिल हैं।

  • 12 निलंबित: इन अधिकारियों पर सीधे तौर पर कर्तव्यों में लापरवाही और वित्तीय अनियमितताओं (Financial Irregularities) के आरोप हैं।

  • विभागीय जांच: 7 अन्य अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट जारी कर विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।

  • वेतन रोका गया: बाकी कर्मचारियों को चेतावनी देते हुए उनका वेतन रोकने और उनसे स्पष्टीकरण मांगने के निर्देश दिए गए हैं।

लखनऊ में हलचल और शासन का रुख

नमामि गंगे और ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के प्रमुख सचिव ने साफ कर दिया है कि जल जीवन मिशन में किसी भी तरह का भ्रष्टाचार या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि जो भी इंजीनियर निर्धारित समय-सीमा (Deadline) के अंदर काम पूरा नहीं करेगा, उसे न केवल सस्पेंड किया जाएगा बल्कि उसके पुराने सर्विस रिकॉर्ड की भी जांच होगी।

जिला स्तर पर बैठे अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे रोजाना काम की प्रोग्रेस रिपोर्ट डैशबोर्ड पर अपलोड करें। अगर डेटा में कोई हेरा-फेरी पाई गई, तो उस जिले के मुख्य अभियंता (Chief Engineer) की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

जनता पर असर और अगला कदम

इस सख्त कार्रवाई से विभाग में हड़कंप मच गया है। सरकार का मानना है कि इससे उन अधिकारियों को एक कड़ा संदेश जाएगा जो सरकारी पैसों और योजनाओं को हल्के में लेते हैं। लखनऊ और आस-पास के इलाकों में रुकी हुई परियोजनाओं को अब तेजी से पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है ताकि गर्मियों के मौसम से पहले अधिक से अधिक घरों में पानी पहुँचाया जा सके।

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