सम्राट चौधरी कैबिनेट में जातीय संतुलन पर बड़ा फोकस, NDA ने साधे सभी समीकरण
3 कोइरी, 3 भूमिहार, 2 कुर्मी समेत हर वर्ग को प्रतिनिधित्व; बिहार चुनाव से पहले बड़ा सामाजिक संदेश
बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही राजनीतिक और जातीय समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है। नई कैबिनेट में NDA ने सवर्ण, ओबीसी, ईबीसी, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों के बीच संतुलन साधने की कोशिश की है।
पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में हुए शपथ ग्रहण समारोह में नरेंद्र मोदी, अमित शाह और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी मौजूद रहे। इस समारोह की सबसे चर्चित बात रही नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की मंत्रिमंडल में एंट्री।
इस बार कैबिनेट में कोइरी और भूमिहार समुदाय को सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व मिला है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी खुद कोइरी समुदाय से आते हैं, जबकि डिप्टी CM विजय चौधरी भूमिहार चेहरा हैं। इसके अलावा कुर्मी समाज से भी दो बड़े नेताओं को जगह दी गई है।
NDA ने इस विस्तार में सामाजिक समीकरणों को साधने के लिए दलित, अति पिछड़ा (EBC), मल्लाह, धानुक, वैश्य और अल्पसंख्यक समुदायों को भी प्रतिनिधित्व दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कैबिनेट विस्तार सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि आने वाले चुनावों की रणनीति का हिस्सा भी है।
BJP, JDU, LJP(R), HAM और अन्य सहयोगी दलों के नेताओं को शामिल कर गठबंधन ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की रणनीति जारी रहेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण हमेशा निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में सम्राट चौधरी कैबिनेट का यह सामाजिक संतुलन आने वाले चुनावी मुकाबलों में NDA की बड़ी ताकत बन सकता है।





