वायु प्रदूषण पर कांग्रेस का तीखा हमला: ‘एयर क्वालिटी’ को बताया देशव्यापी ढांचागत संकट
NCAP पर उठे गंभीर सवाल, कांग्रेस ने केंद्र सरकार की नीति को बताया नाकाफी और कागजी

देश में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने वायु गुणवत्ता को महज कुछ शहरों तक सीमित समस्या मानने से इनकार करते हुए इसे एक देशव्यापी और ढांचागत संकट करार दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया न केवल अप्रभावी है, बल्कि नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) भी अपने उद्देश्यों में पूरी तरह विफल साबित हुआ है।
दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में सर्दी के मौसम के साथ वायु प्रदूषण ने हालात और गंभीर कर दिए हैं। रविवार सुबह दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 297 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। कांग्रेस का कहना है कि यह स्थिति सिर्फ राजधानी तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के सैकड़ों शहर लगातार जहरीली हवा की चपेट में हैं।
कांग्रेस महासचिव एवं संचार प्रभारी जयराम रमेश ने सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के एक नए विश्लेषण का हवाला देते हुए कहा कि भारत में वायु प्रदूषण अब “सबसे खुला रहस्य” बन चुका है। उनके अनुसार, अध्ययन में सामने आया है कि देश के 4,041 वैधानिक नगरों में से 1,787 शहरों में पिछले पांच वर्षों के दौरान PM2.5 का वार्षिक स्तर लगातार राष्ट्रीय मानकों से ऊपर रहा।
कांग्रेस ने NCAP की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं। पार्टी के अनुसार, जहां समस्या का दायरा लगभग 1,800 शहरों तक फैला है, वहीं NCAP के तहत केवल 130 शहरों को ही शामिल किया गया है। इनमें से भी 28 शहरों में अब तक वायु गुणवत्ता मापने के लिए आवश्यक CAAQMS स्टेशन मौजूद नहीं हैं। कांग्रेस का आरोप है कि मौजूदा स्वरूप में NCAP देश के केवल 4 प्रतिशत गंभीर रूप से प्रदूषित शहरों को ही कवर कर पा रहा है।
कांग्रेस का कहना है कि ‘नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम’ अब वास्तव में एक ‘नोशनल क्लीन एयर प्रोग्राम’ बनकर रह गया है, जो कागजों में तो मौजूद है लेकिन ज़मीनी स्तर पर इसके परिणाम बेहद सीमित हैं। पार्टी ने मांग की है कि NCAP की गहन समीक्षा, व्यापक सुधार और पुनर्गठन किया जाए, ताकि देश को इस बढ़ते पर्यावरणीय संकट से उबारा जा सके।





