एसआईआर पर सियासी घमासान: पीएम मोदी के ‘ड्रामा नहीं, डिलीवरी’ तंज पर भड़के अखिलेश, पूछा— क्या BLO की मौतें भी ड्रामा?

संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत से ही तनाव, एसआईआर को लेकर विपक्ष का हंगामा
संसद का शीतकालीन सत्र इस बार बेहद गर्म शुरू हुआ है। ‘वोटर लिस्ट सुधार’ यानी एसआईआर (Systematic Identification Revision) को लेकर विपक्ष ने सरकार पर कड़े आरोप लगाए हैं। सत्र के पहले ही दिन हंगामे के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा— “हमारा फोकस ड्रामा नहीं, डिलीवरी है।”
पीएम के इस बयान पर समाजवादी पार्टी प्रमुख और सांसद अखिलेश यादव ने पलटवार करते हुए सरकार को घेरा और एसआईआर की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए।
अखिलेश यादव का सवाल— “क्या BLO की मौतें भी ड्रामा हैं?”
मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा कि एसआईआर देश के करोड़ों मतदाताओं से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा है और इसे पूरी ईमानदारी से किया जाना चाहिए।
उन्होंने तीखा सवाल उठाते हुए कहा—
“क्या बीएलओ की मौतें भी ड्रामा मानी जाएंगी? सरकार को यह समझना होगा कि एसआईआर सिर्फ कागज़ का काम नहीं है, इसके पीछे हजारों कर्मचारियों की मेहनत और ज़िंदगी जुड़ी है।”
अखिलेश ने कहा कि बीएलओ लगातार दबाव में काम कर रहे हैं, कई जगहों पर उनके लिए सुरक्षा संसाधन तक पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे में उनकी समस्याओं को नज़रअंदाज़ करना गैर–जिम्मेदाराना रवैया है।
क्या है एसआईआर और क्यों बढ़ा विवाद?
एसआईआर यानी Systematic Identification Revision, चुनाव आयोग की वह प्रक्रिया है जिसके तहत मतदाता सूची की जांच और सुधार किया जाता है।
विपक्ष आरोप लगा रहा है कि—
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एसआईआर के नाम पर कई जगह मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए जा रहे हैं
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बीएलओ पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है
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सुरक्षा और संसाधनों की कमी के कारण कर्मचारियों की जान जोखिम में है
सरकार का दावा है कि एसआईआर प्रक्रिया पारदर्शी है और इसका मकसद वोटर लिस्ट को अधिक सटीक और अपडेटेड बनाना है।
सत्र में और बढ़ सकती है गर्मी
अखिलेश यादव के बयान के बाद माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में संसद में एसआईआर और बीएलओ की सुरक्षा का मुद्दा और जोर पकड़ेगा। विपक्ष ने साफ कर दिया है कि वह इस मुद्दे पर सरकार को घेरने के लिए पूरी तरह तैयार है, वहीं सरकार इसे विपक्ष का “राजनीतिक ड्रामा” बता रही है।
सत्र के पहले दिन से ही दोनों पक्षों के बीच बढ़ा यह टकराव आने वाले हफ्तों तक संसद की कार्यवाही को प्रभावित कर सकता है।



