क्या मणिपुर में फिर लौट पाएगी शांति? युमनाम खेमचंद सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती

मेइती-कुकी तनाव, टूटा भरोसा और विस्थापन का दर्द—नई सरकार के लिए आसान नहीं ‘मिशन नॉर्मलसी’

करीब एक साल तक राष्ट्रपति शासन झेलने के बाद मणिपुर में नई सरकार का गठन हो चुका है और युमनाम खेमचंद सिंह ने मुख्यमंत्री पद संभाल लिया है। नई सरकार के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वह राज्य को फिर से पुराने शांत दौर में वापस ले जा पाएगी।

मणिपुर पिछले तीन वर्षों से जातीय हिंसा, अविश्वास और विस्थापन की आग में झुलस रहा है। मेइती और कुकी समुदायों के बीच संघर्ष ने सैकड़ों लोगों की जान ली और हजारों परिवारों को राहत शिविरों में रहने पर मजबूर कर दिया। हाल के महीनों में कुछ इलाकों में शांति की कोशिशें जरूर हुई हैं, लेकिन जमीन पर तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

Related Articles

नई सरकार ने शुरुआत से ही “संतुलन की राजनीति” दिखाने की कोशिश की है। सरकार में मेइती, कुकी और नगा समुदायों को प्रतिनिधित्व दिया गया है, ताकि सभी पक्षों में भरोसा पैदा हो सके।

मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह लगातार संवाद और मेल-मिलाप की बात कर रहे हैं। उन्होंने राहत शिविरों में जाकर मेइती और कुकी-जो समुदायों के विस्थापित लोगों से मुलाकात की, आर्थिक सहायता दी और भरोसा बहाल करने की कोशिश की।

हालांकि चुनौतियां बेहद बड़ी हैं। कई इलाकों में अब भी दोनों समुदायों के बीच गहरा अविश्वास है। हाल ही में फिर हिंसा भड़कने और बच्चों की मौत जैसी घटनाओं ने यह दिखा दिया कि हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं।

राजनीतिक तौर पर भी सरकार के सामने मुश्किलें कम नहीं हैं। कुकी संगठनों के एक हिस्से ने नई सरकार का विरोध किया है और अलग प्रशासन की मांग अब भी जारी है। वहीं, घाटी और पहाड़ी इलाकों के बीच सामाजिक दूरी कम करना भी आसान नहीं होगा।

विशेषज्ञ मानते हैं कि सिर्फ सुरक्षा बलों के सहारे शांति बहाल नहीं की जा सकती। इसके लिए लगातार संवाद, पुनर्वास, रोजगार, शिक्षा और सामाजिक भरोसे की बहाली जरूरी होगी। अगर सरकार इन मोर्चों पर संतुलित तरीके से काम करती है, तभी मणिपुर धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर लौट सकता है।

Related Articles

Back to top button