क्राइम
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गाजियाबाद में 85.80 लाख की कोडीन कफ सिरप बरामद, तीन आरोपी गिरफ्तार
गाजियाबाद। साहिबाबाद में पुलिस ने कोडीन युक्त कफ सिरप की बड़ी खेप बरामद की है। बरामद सिरप की कीमत करीब…
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देवरिया में ईओ के अपहरण की कोशिश के आरोप में तीन गिरफ्तार, भाजपा सांसद के करीबी का नाम भी आया सामने
देवरिया। पथरदेवा नगर पंचायत में ठेके-पट्टों को लेकर चल रहा विवाद अब मारपीट और अधिशासी अधिकारी के कथित अपहरण की…
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दिल्ली-एनसीआर में रेप मामलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बोला- अपराधियों के मन में कानून का डर जरूरी
दिल्ली-एनसीआर में महिलाओं और नाबालिगों से जुड़े हालिया दुष्कर्म के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सख्त रुख अपनाया।…
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दिल्ली में फर्जी जॉब प्लेसमेंट कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 11 आरोपी गिरफ्तार
दिल्ली के शादीपुर के रंजीत नगर इलाके में पुलिस ने फर्जी जॉब प्लेसमेंट कॉल सेंटर का भंडाफोड़ करते हुए 11…
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शाहजहांपुर में जमीन विवाद खूनी संघर्ष में बदला, महिला समेत तीन लोग गंभीर घायल
शाहजहांपुर के देवकली क्षेत्र के चिकटिया गांव में जमीन के विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच हिंसक झड़प हो…
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बिहार: प्रेम विवाह के बाद दहेज और प्रताड़ना का आरोप, महिला को घर से निकाला
बिहार के पूर्णिया जिले के धमदाहा थाना क्षेत्र में एक महिला ने अपने पति और ससुराल वालों पर गंभीर आरोप…
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लखनऊ: भाजपा नेता शिवम सिंह हत्याकांड में CCTV से मिले अहम सुराग, चार आरोपियों की तलाश तेज
लखनऊ के विभूतिखंड इलाके में भाजपा नेता शिवम सिंह की हत्या के मामले में पुलिस जांच अब और तेज हो…
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दाऊद इब्राहिम के करीबी सलीम डोला पर ईडी का शिकंजा, मुंबई-गुजरात में 20 ठिकानों पर छापेमारी
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ड्रग तस्कर मोहम्मद सलीम डोला से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में बड़ा कदम उठाते हुए महाराष्ट्र…
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‘तारीख पर तारीख’ अब और नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्टों को दिए सख्त निर्देश, 3 महीने में सुनाना होगा रिजर्व फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक फैसलों में हो रही अनावश्यक देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए सभी हाईकोर्टों के लिए अहम दिशा-निर्देश दोहराए हैं। अदालत ने कहा कि जब किसी मामले की सुनवाई पूरी होकर फैसला सुरक्षित रख लिया जाए, तो उसे लंबे समय तक लटकाए रखना उचित नहीं है। कोर्ट के अनुसार, यदि तीन महीने के भीतर फैसला नहीं सुनाया जाता है, तो रजिस्ट्रार जनरल को मामला संबंधित हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के सामने रखना होगा। शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी उस मामले की सुनवाई के दौरान की, जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक आपराधिक अपील लगभग एक साल तक फैसला सुरक्षित रहने के बावजूद सूचीबद्ध नहीं की गई थी। सुप्रीम कोर्ट इस देरी को देखकर “हैरान और आश्चर्यचकित” हुआ और कहा कि ऐसे हालात न्यायिक प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा कमजोर करते हैं। कोर्ट ने पहले से मौजूद Anil Rai v. State of Bihar वाले सिद्धांतों को फिर से लागू करते हुए यह व्यवस्था दोहराई कि हर हाईकोर्ट की रजिस्ट्री को समय समय पर उन मामलों की सूची मुख्य न्यायाधीश को देनी होगी, जिनमें फैसला सुरक्षित होने के बावजूद तीन महीने में नहीं सुनाया गया। अगर इसके बाद भी आदेश नहीं आता, तो मुख्य न्यायाधीश संबंधित पीठ को दो हफ्ते के भीतर फैसला सुनाने को कहेंगे; ऐसा न होने पर मामला किसी दूसरी पीठ को सौंपा जा सकता है। यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि आदेश सुरक्षित रखने के बाद लंबे समय तक चुप्पी बनाए रखना सिर्फ प्रक्रियात्मक देरी नहीं, बल्कि न्याय से वंचित करने जैसा है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि कई हाईकोर्टों में ऐसा कोई प्रभावी तंत्र नहीं है, जिससे पक्षकार खुद देरी की शिकायत कर सकें। कुल मिलाकर, यह आदेश हाईकोर्टों के लिए एक सख्त प्रशासनिक संदेश है कि अब “तारीख पर तारीख” की आदत खत्म करनी होगी और सुरक्षित फैसलों को तय समयसीमा में सुनाना ही होगा।
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