यूजीसी के नए समानता नियमों पर फिर मंथन, केंद्र बनाएगी समीक्षा समिति
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने जताई समिति गठित करने की तैयारी, विद्यार्थियों के हितों और चिंताओं को ध्यान में रखकर होगी समीक्षा; चार सप्ताह बाद अगली सुनवाई
उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए बनाए गए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए समानता नियमों पर केंद्र सरकार दोबारा विचार कर रही है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने बताया कि नियमों की समीक्षा के लिए समिति गठित करने पर विचार किया जा रहा है।
केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ को बताया कि सरकार सभी विद्यार्थियों की चिंताओं और हितों को ध्यान में रखना चाहती है।
गौरतलब है कि जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने नए नियमों पर रोक लगा दी थी। अदालत ने नियमों की भाषा अस्पष्ट होने और उनके दुरुपयोग की आशंका जताई थी। साथ ही वर्ष 2012 के पुराने नियम लागू रखने का निर्देश दिया था।
अब समिति गठन की संभावना के बीच सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह के लिए टाल दी है। हालांकि, समिति के सदस्यों और गठन की समयसीमा पर अभी निर्णय नहीं हुआ है।





